तर्क बातों से ही नहीं बल्कि आँखों से भी होता है . आँखों का तर्क समझना मुश्किल है .इस तर्क को किसी परिभाषा में नहीं बंधा जा सकता .यह तर्क शब्दहीन है पर बातों के तर्क से अधिक प्रभावकारी है .आँखों का तर्क इंसान को सच्चा इंसान बना देता है जबकि बातों का तर्क इंसान को जाहिल बना देता है .
आशा के पर लग गए और तुम अभी उड़े नहीं क़यामत का इन्तजार कर रहे क्या ? प्यारी चीज थी तो क्या हुआ .. अब तो रहा नहीं , उस प्यार का लोभ... अब तो छोड़ दो !
Friday, July 13, 2012
Monday, June 25, 2012
एक तारा कहीं खो गया है...
मंजिल । चल तो रहा हूँ । पेड़ों की छांव भी है ....
....पर चैन नही । एक तारा कहीं खो गया है ।
....अब क्या करूँ ।
....पर चैन नही । एक तारा कहीं खो गया है ।
....अब क्या करूँ ।
Monday, April 30, 2012
जीवन क्या है ?
सत्य की तलाश जीवन है
रिश्तों की मिठास जीवन है
प्रकृति का आनंद जीवन है !
तार्किकता का उद्भव जीवन है
आस्था का प्रश्न जीवन है
अराधना का द्वार जीवन है
श्रधा का इजहार जीवन है !
ऊर्जा का संचार जीवन है
कला का आधार जीवन है
पूर्णता का एहसास जीवन है
जग का निर्माण जीवन है !
शून्य का आकार जीवन है
मानवता का ज्ञान जीवन है
आध्यात्मिक उत्थान जीवन है
संघर्ष का परिणाम जीवन है !
Sunday, April 29, 2012
तुम्हारी याद
तुम्हारी याद
गुनगुनी धूप की तरह
जीवन के पहर में
चंद सांसों के मध्य !
आवाज लगाता गया
याद आती गयी
इस सर्द मौसम में
गुनगुनी धूप की तरह
और पहर ख़त्म !
बेचैन मन
एक टक देखता
बीते लम्हों को
और निहारता
गुनगुनी धूप !
Tuesday, April 24, 2012
बुरा जो देखन मैं चला
मेरे मित्र फरहान सोनी पर एक कुते ने चढ़ाई कर दी ....रात में टहलने के लिए निकले थे .थोड़ी सी खरोंच आ गयी ....डॉक्टर से सुई भी लगवा आये ....
....दुसरे दिन रात में मिलने पर मुझसे कहने लगे ...मेरे मन से कुते का डर हमेशा के लिए निकल गया ....पर मै उसे सबक सिखाना चाहता हूँ की दुबारा ऐसी गलती न करे और जब मै टहलने जाऊं तो दुबारा मुझे काटने की जुर्रत न करे ......कौन मेरा साथ देगा ? ....मैंने कहा ...ठीक है आप मोटे- मोटे दो बेंत का उपाय करे ,चलते है!....उसे डरा कर आ जायेंगे ...लेकिन बहुत ज्यादा नहीं मारेंगे ......
....फरहान ने कहा ...मै आप लोगों को उचित समय पर कॉल करता हूँ.....अब इंतज़ार है उनके उचित समय का !!!
................................................
दिल्ली के पुस्तक मेले से रविन्द्र नाथ टैगोर जी की जीवनी खरीद लाया .....आज मौका मिला है ...शुरुआत करने का ....काफी रोमांचित हूँ ,जो कुछ भी विचारणीय होगा ...आप आदरणीय गुरुजनों एवं मित्रों से जरुर शेयर करूँगा .
..................................
देर रात आज के राजनीतिक हालत पर काफी क्षुब्ध हो गया था ...''.सब समस्याओं की जड़ में हमारे माननीय राजनेताओं का ही हाथ है ''...ऐसी ही अनुभूति हो रही थी .
....तभी मुझे ध्यान आया कि समाज के लिए जितना करना चाहिए ,क्या मै उतना कर रहा हूँ ?....नहीं !!
.....तो फिर दोष देने से ही काम नहीं होगा ...काम होगा कुछ करने से .....!!
बुरा जो देखन मैं चला,
बुरा ना दिखया कोय।
जो दिल ढूंढा आपना,मुझसे बुरा ना कोय।।
फिर नींद आने लगी .....और सोने चला गया .
वातावरण
हमारे चारों ओर की हवा, वस्तुएं और हमारा समाज जिसमें हम रहते हैं वातावरण का अभिन्न अंग हैं । ये हमारे जीवन के ढंग को पारिभाषित करने में अपनी अहम भूमिका निभाता है ....
प्रकृति से लडता हुआ मनुष्य बहुत ही विकसित अवस्था तक पहुंच चुका है , पर लोगों के जीवन स्तर के मध्य का फासला जितना बढता जा रहा है , भाग्य की भूमिका उतनी अहम् होती जा रही है....
हमारे समाज का वातावरण इतना दूषित हो गया है की, प्रत्येक व्यक्ति की सोच में नकारात्मक बातों ने डेरा जमा लिया है. शायद वह इस भ्रष्ट व्यवस्था से कुंठित हो चुका है .यही कारण है हम प्रत्येक व्यक्ति को सिर्फ संदेह की द्रष्टि से ही देखते हैं,जिसका भरपूर लाभ हमारे राजनेता उठाते हैं.वे अपने भ्रष्ट कारनामों को बड़ी सफाई से झुठला कर अपने विरोधियों को जनता की नजरों में भ्रष्ट एवं अपराधी सिद्ध करने में कामयाब हो जाते हैं.जनता उनके बहकावे में आकर क्रांति कारी व्यक्तियों के विरुद्ध अपनी सोच बना लेती है और नेताओं के काले कारनामों को भूल जाती है..जनता के लिए यह सोचना मुश्किल हो गया है की आज के भ्रष्ट युग में भी कोई इमानदार हो सकता है, कोई देश भक्त भी हो सकता है, जो देश के लिए निःस्वार्थ होकर संघर्ष कर सकता है....
नेशनल ओशियानिक एंड एटमोसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के नेतृत्व में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय टीम वातावरण में हाइड्रॉक्सिल रेडिकल के स्तर की गणना की। यह वातावरण के रासायनकि संतुलन में अहम भूमिका निभाता है।
वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि सालाना आधार पर हाइड्रॉक्सिल के स्तर में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। इससे पहले कुछ अध्ययनों में कहा गया था कि इसके स्तर में 25 फीसदी तक का फर्क पड़ा है। लेकिन नया अध्ययन इस बात को खारिज करता है।
एनओएए के ग्लोबल मॉनिटरिंग विभाग में काम करने वाले मुख्य रिसर्चर स्टीफन मोंटत्सका बताते हैं, 'हाइड्रॉक्सिल के स्तर की नई गणना से वैज्ञानिकों को पता चला है कि वातावरण की खुद को साफ करने की क्षमता कितनी है। अब हम कह सकते हैं कि प्रदूषकों से छुटकारा पाने की वातावरण की क्षमता अब भी बनी हुई है। अब तक हम इस बात को तसल्ली से नहीं कह पा रहे थे।'
एनओएए के ग्लोबल मॉनिटरिंग विभाग में काम करने वाले मुख्य रिसर्चर स्टीफन मोंटत्सका बताते हैं, 'हाइड्रॉक्सिल के स्तर की नई गणना से वैज्ञानिकों को पता चला है कि वातावरण की खुद को साफ करने की क्षमता कितनी है। अब हम कह सकते हैं कि प्रदूषकों से छुटकारा पाने की वातावरण की क्षमता अब भी बनी हुई है। अब तक हम इस बात को तसल्ली से नहीं कह पा रहे थे।'
प्रकृति के इस रम्य वातावरण को देख मन आह्लादित हो उठता है। जो प्रसन्नता मन को भोरकालीन वातावरण में मिलती है, वह अवर्णनीय है। सुबह पंक्षियों का कलरव, मंद गति से बहती शीतल हवा, बयार में शांत पेड़ पौधे अपने अप्रितम सौंदर्य का दर्शन देते हैं, दैनिक जीवन की शुरूआत से पहले बिल्कुल शांत और निर्वाण रूप होता है सुबह का।
पौधे अपने निर्विकार रूप में खडे होते हैं, पेड़ पौधों में जान होती है परंतु वे स्व से अपने पत्तियों को खड़का नहीं सकते, वे तो प्रकृति प्रदत्त वातावरण पर आश्रित होते हैं। भोर में पेड़ पौधों पर पड़ी ओस, मोती सा आभास देती है, और जलप्लवित पत्तियों से ऊर्जा संचारित होती है, वह ऊर्जा लेकर हम अपने जीवन की शुरूआत करते हैं।
डायबिटीज रोगियों पर वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है। आइए जानें डायबिटीज रोगियों को वातावरण कैसे प्रभावित करता है।
- वातावरण कई तरह का हो सकता है। चाहे घर का माहौल हो, कार्यालय का माहौल हो। आसपास के लोगों का माहौल हो या फिर किस जगह पर कैसे आप जाते हैं इन सबका डायबिटिक के स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ता है।
- धूम्रपान और नशीले पदार्थ- मान लीजिए कोई डायबिटिक मरीज ऐसे लोगों के साथ रहता है जो धूम्रपान बहुत करते हैं, इतना ही नहीं एल्कोहल और नशीले पदार्थों का सेवन भी करते हैं तो निश्चित रूप से डायबिटीज के रोगी पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि डायबिटीज मरीज ना सिर्फ इन चीजों का आदी हो सकता है बल्कि धूम्रपान का धुआं भी डायबिटीज मरीज को हृदय जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकता है। अगर ये कहें कि डायबिटीज मरीज पर धूम्रपान का असर बुरा पड़ता है तो यह कहना गलत ना होगा।
- जगह- यदि डायबिटीज मरीज किसी कारखाने में काम करता है या फिर ऐसी जगह काम करता है जहां केमिकल इत्यादि का काम होता है या फिर जहां बहुत अधिक गंदगी है तो इसका असर डायबिटीज मरीज को और अधिक बीमार बना सकता है और डायबिटीज रोगी को कई और बीमारियां या संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है.
- प्रदूषण- प्रदूषण का डायबिटीज मरीज के स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ता है। अगर डायबिटीक पेशेंट प्रदूषण वाले स्थान पर रहता है तो डायबिटीज मरीज को सांस संबंधी बीमारियां होने की आंशका रहती है। इतना ही नहीं प्रदूषण के कारण डायबिटीज से होने वाली समस्याएं बढ़ जाती हैं है। यह बात शोधों में भी साबित हो चुकी है।
Monday, April 23, 2012
साधू बाबा
साधू बाबा भागे जा रहे थे और लड़के पीछा कर रहे थे ....एक और एक और ....
बाबा बच्चों को एक एक लचदाना दे रहे थे , अब बच्चों की संख्या से परेशान होकर अब जल्दी से भाग जाना चाहते थे.बच्चे तो खैर बच्चे ही होते है वे खाकर फिर माँगना शुरू कर देते थे ....बाबा एक और ..एक और ...
बाबा गुस्सा हो गए और परेशान होकर बच्चों को भगाने लगे ....और गुस्सा होकर पत्थर मारकर खदेड़ने लगे ....लड़के धीरे धीरे डर के कारण भाग गए ......बाबा का धैर्य टूट गया था .मै भी उन बच्चों में शामिल था ....किस्मत अच्छी थी ....बाबा का कोई पत्थर मुझे नहीं लगा.
Saturday, April 21, 2012
आज जरुरत है , आजाद ख़याल की...
आज जरुरत है , आजाद ख़याल की । आजाद ख़याल तो कभी कभी ही आते है । पुराने भरे पड़े है । उन्ही में से आते रहते है । पर जब आजाद ख्याल आते है तो हलचल मचा देते है । कभी कभी ये ख्याल मन बहलाने के तरकीब ही नजर आते है । आजाद ख़याल तो आ जाते है फ़िर दब जाते है । हालात से समझौता कर लेते है । जब यही करना था तो आने का कोई मतलब नही रह जाता । आओ तो पुरी तरह से आओ , नही तो आओ ही मत ।
Saturday, March 10, 2012
यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे तबे एकला चलो रे।...
‘यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे तबे एकला चलो रे।’.................
ये गाना ही नहीं बल्कि जीवन दर्शन है .कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर, एक व्यक्ति का नहीं एक युग और एक संस्था का नाम है .
गाँधी जी इसी दर्शन के सहारे नोवाखली में साम्प्रदायिकता के खिलाफ अकेले खड़े हो गए थे .
इस जीवन दर्शन से प्रेरणा प्राप्त होती है .एकला चलो रे ...कामयाबी और मानसिक संतुष्टि का दूसरा नाम है .
यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे
तबे एकला चलो रे।
एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे!
यदि केऊ कथा ना कोय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि सबाई थाके मुख फिराय, सबाई करे भय-
तबे परान खुले
ओ, तुई मुख फूटे तोर मनेर कथा एकला बोलो रे!
यदि सबाई फिरे जाय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि गहन पथे जाबार काले केऊ फिरे न जाय-
तबे पथेर काँटा
ओ, तुई रक्तमाला चरन तले एकला दलो रे!
यदि आलो ना घरे, ओरे, ओरे, ओ अभागा-
यदि झड़ बादले आधार राते दुयार देय धरे-
तबे वज्रानले
आपुन बुकेर पांजर जालियेनिये एकला चलो रे!
ये गाना ही नहीं बल्कि जीवन दर्शन है .कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर, एक व्यक्ति का नहीं एक युग और एक संस्था का नाम है .
गाँधी जी इसी दर्शन के सहारे नोवाखली में साम्प्रदायिकता के खिलाफ अकेले खड़े हो गए थे .
इस जीवन दर्शन से प्रेरणा प्राप्त होती है .एकला चलो रे ...कामयाबी और मानसिक संतुष्टि का दूसरा नाम है .
यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे
तबे एकला चलो रे।
एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे!
यदि केऊ कथा ना कोय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि सबाई थाके मुख फिराय, सबाई करे भय-
तबे परान खुले
ओ, तुई मुख फूटे तोर मनेर कथा एकला बोलो रे!
यदि सबाई फिरे जाय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि गहन पथे जाबार काले केऊ फिरे न जाय-
तबे पथेर काँटा
ओ, तुई रक्तमाला चरन तले एकला दलो रे!
यदि आलो ना घरे, ओरे, ओरे, ओ अभागा-
यदि झड़ बादले आधार राते दुयार देय धरे-
तबे वज्रानले
आपुन बुकेर पांजर जालियेनिये एकला चलो रे!
Wednesday, March 7, 2012
ऐ मनुष्य
ऐ मनुष्य,
कब तक शोक मनायेगा ...और ज़िन्दगी लुटती जाएगी
..फिर शोक कैसा ?ये शोक नहीं चुभन है .
ज़िन्दगी भर का दर्द है .टूटे हुए तारों का लोभ ...
अब तो छोड़ दो !
हाथ में आई चांदनी को समेट लो ...
एक सितारा जग मगा रहा ...
आशा करो वो बुझाने पाए नहीं ...
ऐ मनुष्य,
कब तक शोक मनायेगा ...और ज़िन्दगी लुटती जाएगी
आशा के पर लग गए और तुम अभी उड़े नहीं
क़यामत का इन्तजार कर रहे क्या ?
प्यारी चीज थी तो क्या हुआ ..
अब तो रहा नहीं ,
उस प्यार का लोभ...
अब तो छोड़ दो !
कब तक शोक मनायेगा ...और ज़िन्दगी लुटती जाएगी
..फिर शोक कैसा ?ये शोक नहीं चुभन है .
ज़िन्दगी भर का दर्द है .टूटे हुए तारों का लोभ ...
अब तो छोड़ दो !
हाथ में आई चांदनी को समेट लो ...
एक सितारा जग मगा रहा ...
आशा करो वो बुझाने पाए नहीं ...
ऐ मनुष्य,
कब तक शोक मनायेगा ...और ज़िन्दगी लुटती जाएगी
आशा के पर लग गए और तुम अभी उड़े नहीं
क़यामत का इन्तजार कर रहे क्या ?
प्यारी चीज थी तो क्या हुआ ..
अब तो रहा नहीं ,
उस प्यार का लोभ...
अब तो छोड़ दो !
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