Saturday, September 30, 2017

अनुभव

पूर्व के अनुभव से एक बात कह सकता हूँ की विकट परिस्थितियों के लिए कुछ पैसे जरूर रहना चाहिए... अन्यथा ऐसी लाचारी का भाव उत्पन्न होता है जिसे बयान नहीं किया जा सकता।

Monday, September 4, 2017

एक ज्वलंत प्रश्न!


एक ज्वलंत प्रश्न !
दुष्कर्म और कुकर्म के खिलाफ
 सामूहिक आवाज कब उठेगी ?
 कृत्रिम मिथक अब टूट जाने चाहिए
 आखिर कबतक सताते रहेंगें !

क्या शारीरिक सौन्दर्य ही
उसकी सबसे बड़ी पूंजी है ?
क्या वह सिर्फ और सिर्फ
वस्तु  बनके रह गयी
का हे की आधुनिकता !

शक्तिरूपा का केवल गुणगान
अब नहीं करना
व्यवहार में हस्ती का निर्माण
कब होगा ?
समाज के सामने एक ज्वलंत प्रश्न !

Sunday, July 9, 2017

Saturday, October 1, 2016

आदत है...

आदत है
भँवरें के पीछे जाना
रोज दुपहरी में 
एकटक निहारना
मौसम बदला क्या !

Friday, February 19, 2016

सपनों की पूर्णता
अभिलाषा की पहचान है
व्यथा की आहट
संघर्ष का परिणाम है 

Tuesday, January 13, 2015

Monday, March 17, 2014

गाँव में पहले एक गाना भी सुनने को मिल जाता था.…. “राम जी की चिरिया, रामजी का खेत।। खाय ले चिरिया, भर-भर पेट।। अब यह गाना कहीं भी सुनने को नहीं मिलता। सच!! कितना बदल गया सबकुछ …
एक अनजान आदमी नदी की धारा के साथ बहता हुआ कल्पनातीत ख्यालों में डूबा लहरों से बातें करता हुआ थपेड़ों को चीरता चला जा रहा है ! अचानक कुछ सकुचाता हुआ लहरों को छू लिया अब व्यग्र हो सोच रहा कहीं लहरें मैली तो नहीं हो गयी उसके स्पर्श से !

Tuesday, October 22, 2013

गीता को हमलोग मजाक में प्रोफ़ेसर गीता शर्मा कहते थे.

13 दिसंबर 2000 का दिन... करीब तीन बजे हमारा ग्रुप बातचीत  करते हुए पन्त पार्क की ओर चल दिया। हम लोग स्नातक के द्वितीय वर्ष में थे। गोरखपुर विश्व विद्यालय में इस समय तक पीरियड ख़त्म हो जाते थे।  पन्त पार्क हमारी मटर गस्ती का एक महत्वपूर्ण ठिकाना था।  हमारी क्लास कला संकाय में चलती थी।  हमारे ग्रुप में 6  सदस्य थे।  उस दिन मौसम काफी सुहावना था।  इसलिए हमने तय किया की एक दो घंटे चर्चा करते है।  हमारे बीच चर्चा के विषयों में काफी विविधता होती थी।

पार्क में एक जगह सभी बैठ गए। शुरुआत हमेशा की तरह हमारे ग्रुप की सबसे तेज सदस्य गीता की तरफ से हुई।  गीता को हमलोग मजाक में प्रोफ़ेसर गीता शर्मा कहते थे।  गीता द्वारा किया गया पहला प्रश्न था।  जौनपुर में शर्की  राज्य की स्थापना किसने और कब की ?
हमें यह उम्मीद नहीं थी की प्रोफ़ेसर गीता अचानक ऐसा प्रश्न करेंगी।  लेकिन अब प्रश्न पर विचार करना जरुरी था।  पवन ने बताया की शार्की साम्राज्य की स्थापना फीरोज़ शाह तुगलक के एक अमीर  मलिक सरवर  द्वारा किया गया।  लेकिन उसे यह नहीं पता था कि इसकी स्थापना कब की गयी ?संयोग से मुझे पता था  मैंने तपाक से उतर दिया। … 1394 ई.में।

गीता द्वारा किया गया दूसरा प्रश्न था।  गुलबर्गा का एक स्वतंत्र  राज्य के रूप में स्थापना एवं यहाँ के वास्तु कला का विकास।  यह एक ऐसा प्रश्न था जिसका पूरा उतर शायद ही किसी को पता हो।  गुड्डू ने बताया - 1347 ई. में अलाउद्दीन बहमन के नेतृत्व में गुलबर्गा एक स्वतंत्र राज्य बना इसी के साथ दक्कन में वास्तुकला का विकास शरू हुआ।  नीना ने कहा - गुलबर्गा किले के अन्दर जो जमा मस्जिद है वह भिन्न तथा विशिष्ट है।  तभी मुझे अचानक याद आया की इस मस्जिद की  डिजायन  14 वीं सदी के महान शिल्पकार रफ़ी ने तैयार किया था।
आगे प्रश्न के उतर को गीता ने खुद पूरा किया -गुलबर्गा के जमा मस्जिद के बीच का खुला स्थान छोटे छोटे गुम्बदों से भरा पड़ा है जो मेहराब पर अवलम्बित और पास पास बने है।  संभवतः लीक से हट कर बनायीं मस्जिद का यह प्रारूप रुढ़िवादियों को पसंद नहीं आया।

इस प्रश्न को ग्रुप के सभी सदस्यों ने  सराहा और प्रश्न पूछने के लिए धन्यवाद भी दिया। अपनी तारीफ़ सुनकर गीता के होठों पर मुस्कान फ़ैल गयी।  एक बात और उसका चेहरा उस वक्त की चर्चित टेनिस खिलाड़ी मार्टिन हिंगिस से मिलता था। आगे की बातचीत फिर कभी ……

Monday, September 9, 2013

मेरी सोच

 शब्द नहीं जानता ,पर इंसान को पहचानता हूँ ....उन भूखे लोगो के लिए मन में कुछ विचार है जिन्हें करना है .जिंदगी के दौड़ में वे शायद पीछे रह गए ....गीता और कुरआन से पहले उन्हें पढना चाहता हूँ.

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मै और भाग  नहीं सकता या फिर भागना चाहता ही नहीं ....कुछ ऐसा हुआ है, भागने की लालसा ख़त्म हो गयी ....चूहा दौड़ में अब मन नहीं रमता  .....या तो मै बहुत पीछे छुट गया या फिर मेरी सोच जमाने से आगे है .......कुछ भी हो चूहा दौड़, अब मन नहीं रमता ......