Monday, June 25, 2012

एक तारा कहीं खो गया है...

मंजिल । चल तो रहा हूँ । पेड़ों की छांव भी है ....
....पर चैन नही । एक तारा कहीं खो गया है ।
....अब क्या करूँ ।

4 comments:

  1. जीवन तो फिर भी जीना है ... चलना पढता है किसी के बिन भी ....

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  2. कभी कभी सब कुछ पास होकर भी कोई कमी सी लगती है....

    अनु

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