साधू बाबा भागे जा रहे थे और लड़के पीछा कर रहे थे ....एक और एक और ....
बाबा बच्चों को एक एक लचदाना दे रहे थे , अब बच्चों की संख्या से परेशान होकर अब जल्दी से भाग जाना चाहते थे.बच्चे तो खैर बच्चे ही होते है वे खाकर फिर माँगना शुरू कर देते थे ....बाबा एक और ..एक और ...
बाबा गुस्सा हो गए और परेशान होकर बच्चों को भगाने लगे ....और गुस्सा होकर पत्थर मारकर खदेड़ने लगे ....लड़के धीरे धीरे डर के कारण भाग गए ......बाबा का धैर्य टूट गया था .मै भी उन बच्चों में शामिल था ....किस्मत अच्छी थी ....बाबा का कोई पत्थर मुझे नहीं लगा.
बहुत सही।
ReplyDeleteसादर
Aisa bhi hota hai....
ReplyDeleteक्या सही क्या गलत बचपन के दिनों में कहा पता...
ReplyDeleteबचपन की ऐसी यादें बहुत मजा देती हैं ..
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