Friday, August 24, 2012

कौन हो तुम ? अपरिचित !

कौन हो तुम ? अपरिचित !

मेरे ह्रदय में उदार संवेदना को जागृत  किया 
आध्यात्मिक समझ को प्रेरित किया 
मेरे मानस को झकझोर दिया 
कल्पना को यथार्थ कर दिया 
 
कौन हो तुम ? अपरिचित !

असाधारण काव्य सौन्दर्य को प्रकाशित किया 
मनमोहक स्मृतियों को उभार दिया 
मेरे दब्बूपन को आक्रोशित किया 
मेरे जीवन का साक्षात्कार लिया 

16 comments:

  1. कौन हो तुम ? अपरिचित !
    प्रेरणा (*_*)

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (25-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. बहुत खूब !
    वो अपरिचित ज्यादातर
    परिचित होता है
    जरूरी नहीं कि सबको
    पता होता है !

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  4. वो ही तो सर्व नियन्ता है।

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  5. कल 26/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. बहुत सुन्दर...

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  7. सुंदर उद्गार हृदय के ...शुभकामनायें

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  8. सुंदर प्रस्तुति

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  9. सुंदर काव्य सृजन।

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  10. जीवन से साक्षात्कार तो इंसान स्वयं ही करता है ...
    लाजवाब ...

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  11. सुन्दर पंक्तियाँ

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