Friday, August 17, 2012

निरंकुशता अमानवीय है...

निरंकुशता अमानवीय है .निरंकुश व्यक्ति दुसरे का भला नहीं कर सकता .कोई संस्था भी अगर निरंकुश हो जाय तो लोगों पर बोझ बढ़ जाता है. निरंकुशता सामंजस्य को तोड़ देता है . अहंकार को बढ़ावा देता है . यह प्रवृति हमारे माननीय राजनेताओं घर कर गयी है . इसका असर संसद पर भी परिलक्षित हो रहा है .यह भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है .संसद सामंती संस्था के रूप में काम न करे, इसे देखना अत्यावश्यक है.

6 comments:

  1. निरंकुशता अमानवीय है !
    सच्ची बात !

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (18-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. निरंकुशता तो अब हर जगह छाने लगी है
    आदमी को भी अब नींद सी आने लगी है !

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  4. यही हो रहा है..... सहमति

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