Wednesday, September 5, 2012

स्पर्श

एक अनजान आदमी
नदी की धारा  के साथ बहता हुआ
कल्पनातीत ख्यालों में डूबा
लहरों से बातें करता हुआ
थपेड़ों को चीरता
चला जा रहा है !

अचानक
कुछ सकुचाता हुआ
लहरों को छू लिया
अब व्यग्र हो  सोच रहा
कहीं लहरें मैली तो नहीं हो गयी
उसके स्पर्श से !

11 comments:

  1. कम से कम इतनी चेतना तो बची थी कि उसने सोचा लहरें तो मैली नहीं हो गईं ..... आज कल तो लोग जानबूझ कर मैला कर देते हैं ... सुंदर प्रस्तुति

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  2. sahi kaha Sangeeta ji ne ...sundar prastuti ke liye badhai ...!!

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  3. काश की ये संकोच और व्यग्रता हर इंसान को महसूस होती... गहन भाव

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  4. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 06-09 -2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....इस मन का पागलपन देखूँ .

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  5. वाह...
    बहुत सुन्दर..

    अनु

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  6. क्यों ...इतनी हीन भावना क्यों...!!!!!

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  7. बेहतरीन अभिव्यक्ति..
    :-)

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  8. नई सोच को दिशा देती रचना ... बहुत खूब ...

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  9. क्या बात है !
    बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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