आशा के पर लग गए और तुम अभी उड़े नहीं क़यामत का इन्तजार कर रहे क्या ? प्यारी चीज थी तो क्या हुआ .. अब तो रहा नहीं , उस प्यार का लोभ... अब तो छोड़ दो !
Sunday, November 1, 2009
ज़माना बदल गया !
अब घोडें कम दीखते है । फिल्मों में भी नहीं । उनका भी एक ज़माना था । शान से दौड़ते थे । ....पर अब क्या काम ?
बेचारें । रहेगें कहाँ ? हमने तो जगह छोड़ी ही नहीं ।
बेचारें । रहेगें कहाँ ? हमने तो जगह छोड़ी ही नहीं ।
Saturday, October 3, 2009
यादें ......
यादें ....उफ्फ ये यादें । ज़िन्दगी भर का दर्द ...और गम । कभी दिन के उजालें में तो कभी रात के अन्धेरें में । कभी मेले में तो कभी वीराने में हलचल ...
उफ्फ ये यादें .....मानो जीवन भर साथ निभाने का ठेका ले रखा है ।
क्या करूँ ...अब तो इस बेचारे पर उसे दया भी नही आती ।
सच ! सोच कर ही काँप जाता हूँ ....उफ्फ ये यादें ।
उफ्फ ये यादें .....मानो जीवन भर साथ निभाने का ठेका ले रखा है ।
क्या करूँ ...अब तो इस बेचारे पर उसे दया भी नही आती ।
सच ! सोच कर ही काँप जाता हूँ ....उफ्फ ये यादें ।
Saturday, September 19, 2009
मेरी ज़िन्दगी में कुछ भी खुबसूरत नही
....अपने को ही पहचान न सका
....और भटक गया
मेरी ज़िन्दगी में कुछ भी खुबसूरत नही
..जो कुछ था उसे भी बहता पाया
....अपने को ही पहचान न सका
दर्द के वीराने में .....
भटकता ही रह गया
कुछ ढूढता ही रह गया
....और एक कंकड़ भी न पा सका
....और भटक गया
मेरी ज़िन्दगी में कुछ भी खुबसूरत नही
..जो कुछ था उसे भी बहता पाया
....अपने को ही पहचान न सका
दर्द के वीराने में .....
भटकता ही रह गया
कुछ ढूढता ही रह गया
....और एक कंकड़ भी न पा सका
......एक इंसान हूँ
मै तुम्हारी तरह... जाने वालो
जरा
मुड के देखो मुझे .......एक इंसान हूँ ।
.....................पर मेरी आवाज किसी ने नही सुनी ।
.................कांपती हुई आवाज विलीन हो गई ।
................मै ठगा देखता ही रह गया और कारवां निकल गया ।
...........शायद मेरी किस्मत ने मुझे धोखा दे दिया
.........और मै एक नाकामयाब इंसान बन गया ।
जरा
मुड के देखो मुझे .......एक इंसान हूँ ।
.....................पर मेरी आवाज किसी ने नही सुनी ।
.................कांपती हुई आवाज विलीन हो गई ।
................मै ठगा देखता ही रह गया और कारवां निकल गया ।
...........शायद मेरी किस्मत ने मुझे धोखा दे दिया
.........और मै एक नाकामयाब इंसान बन गया ।
Friday, September 4, 2009
किस्मत .....
किस्मत सो गई .... आखे थक गई । अब जाओ ..... मै भी जा चुका । अब मुझे तन्हा रहने दो । मुझे मजाक बनने दो .... तुमसे कोई शिकायत नही । गलती मेरी है । इतना चाहा । सारा जीवन दे दिया । अब मेरी शाम आ गई है तो तुम भी ...
पागल था । तेरी मुस्कुराहटों का । जागता था रातभर तुमको यादकर ..... तुमने अपनी अदाओं से जादू कर दिया ।
मै खिचता चला गया । तू मेरी मंजील थी । अब मै क्या राहें भी थक गई पर तेरा दर्शन नही हुआ । अब मै जा रहा हूँ ...... सबको छोड़कर ।
पागल था । तेरी मुस्कुराहटों का । जागता था रातभर तुमको यादकर ..... तुमने अपनी अदाओं से जादू कर दिया ।
मै खिचता चला गया । तू मेरी मंजील थी । अब मै क्या राहें भी थक गई पर तेरा दर्शन नही हुआ । अब मै जा रहा हूँ ...... सबको छोड़कर ।
Tuesday, September 1, 2009
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