Friday, April 17, 2009

सपना

एक श्वेत श्याम सपना । जिंदगी के भाग दौड़ से बहुत दूर । जीवन के अन्तिम छोर पर । रंगीन का निशान तक नही । उस श्वेत श्याम ने मेरी जिंदगी बदल दी । रंगीन सपने ....अब अच्छे नही लगते । सादगी ही ठीक है ।

8 comments:

  1. आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.... आपकी अगली पोस्ट का इन्तेजार है...

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  2. 'सादगी ही ठीक है '
    -सही सोच.

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  3. आप का ब्लाग बहुत अच्छा लगा।
    मैं अपने तीनों ब्लाग पर हर रविवार को
    ग़ज़ल,गीत डालता हूँ,जरूर देखें।मुझे पूरा यकीन
    है कि आप को ये पसंद आयेंगे।

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  4. आपने सपनो को नई तरह से परिभाषित किया है...!सच है कुछ सपने श्वेत श्याम ही अच्छे .. लगते है...जैसे की पुरानी फिल्में...!ठीक है सादगी का भी अपना मज़ा है.....

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  5. आप का ब्लॉग मैं पड़ा (padhaa)
    अच्छा लगा
    अच्छा लगा कलम का प्रेम
    और प्रेम का कलम ........

    महोदय , आप से निवेदन है कि अपनी अच्छी से अच्छी रचनाये ये मेरे ब्लॉग मंच पर दे |
    इसपर मैं लिखने के लिए आप को amantrit करता हूँ
    आशा है कि आप अपने सबद मंच पर देंगे जैसी ब्लोगेर्स आप को अधिक से अधिक पसंद कर सकते है
    आप का ईमेल होता तो मैं आप के देखने से पहले ही आप को उसका सदस्य bana देता
    आप कि कवितायेँ अच्छी लगी और उनको पड़कर और भी अच्छा
    नमस्कार
    आपका भाई
    अम्बरीष मिश्रा

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  6. मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

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  7. सही जा रहे हो भाई,
    गांधी जी भी इसी रास्ते पर चलकर महान बनें थे,
    वे रूपए तो ज्यादा न कमा सके पर हर तरह के रूपए , सिक्कों पर छा जरूर गए.

    वे अपने परिवार के लिए ज्यादा कुछ क्या, कुछ भी न कर सके पर देश के लिए, हमारे, आपके लिए बहुत कुछ कर गए.


    चन्द्र मोहन गुप्त

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