Thursday, February 23, 2012

गीता और कुरआन से पहले.......

 कठिन  शब्द नहीं जानता ,पर इंसान को पहचानता हूँ ....उन भूखे लोगो के लिए मन में कुछ विचार है जिन्हें करना है .जिंदगी के दौड़ में वे शायद पीछे रह गए ....गीता और कुरआन से पहले उन्हें पढना चाहता हूँ.

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मै और भाग  नहीं सकता या फिर भागना चाहता ही नहीं ....कुछ ऐसा हुआ है, भागने की लालसा ख़त्म हो गयी ....चूहा दौड़ में अब मन नहीं रमता  .....या तो मै बहुत पीछे छुट गया या फिर मेरी सोच जमाने से आगे है .......कुछ भी हो चूहा दौड़ अब मन नहीं रमता ......

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सच बोल कर भी लोग मजे से रह लेते है ...तो फिर झूठ बोल जमता नहीं ....सत्यवादी शायद नहीं हूँ ...पर सत्य के आगोश में जाना चाहता हूँ....

13 comments:

  1. सच बोल कर भी लोग मजे से रह लेते है ...तो फिर झूठ बोल जमता नहीं ....सत्यवादी शायद नहीं हूँ ...पर सत्य के आगोश में जाना चाहता हूँ....

    और हमेशा युहीं रहना.... !!

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  2. सच बोल कर भी लोग मजे से रह लेते है ...तो फिर झूठ बोल जमता नहीं ....सत्यवादी शायद नहीं हूँ ...पर सत्य के आगोश में जाना चाहता हूँ....

    और हमेशा युहीं रहना.... !!

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    1. koshish to yahi rahengi ant tak......

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  3. सुंदर और प्रेरक अभिलाषाएं !

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    1. dhanywaad sir.yahi abhilashayen to meri hai...baaki ka pata nahi...

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  4. कल 13/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. सफल हों.......इरादे कायम रहें...
    शुभकामनाएँ.

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  6. गीता और कुरआन से पहले उन्हें पढना चाहता हूँ.
    इससे बड़ी इबादत और कोई नहीं ....सीढ़ी सच्ची अभिव्यक्ति!!

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  7. क्षमा कीजियेगा - सीधी*

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  8. किसी के मन की इबारत पढ़ना ..किसी भी ग्रन्थ को पढ़ने से ज्यादा अच्छा है

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