Friday, December 4, 2009

मजे के लिए बहते जाना उचित है क्या ?

जीवन की इस धारा में बहते चले जाना कभी कभी बहुत अच्छा भी लगता है ..पर कभी लगता है की इसी तरह बिना किसी प्रतिरोध के बहते रहना अच्छा नहीं है . ऐसा लगता है की इनर्जी ख़त्म होती जा रही है . उसे समेटना होगा और फिर प्रतिरोध भी करना होगा .
....पर क्या करे इस बहाव का भी अपना मज़ा है भले ही कोई उपलब्धि नहीं है ..पर  शान्ति बहुत है . क्या इस शान्ति को छोड़ कर आगे बढ़ जाऊं . हाँ यही सही रहेगा ..पर फिर शान्ति की लालच आ ही जाती है ....बहुत बुरी आदत है ..पर मजेदार आदत है ....आप ही बताओ ज़िन्दगी ऐसे चलती है भला ! मजे के लिए बहते जाना उचित है क्या ?

11 comments:

  1. बहुत ही सुंदर लिखा है आपने! ज़िन्दगी में दुःख तो आते ही हैं पर हर दिन खुशी से जीना इसी का नाम ही ज़िन्दगी है! पर ये सच है की लालच आती है पर हमें संतुष्ट रहना चाहिए बल्कि नही बहकना चाहिए! लालच बुरी बाला है! हमें प्रयत्न करना चाहिए की मेहनत करके अपने सपनो को पूरा करें और फिर हँसी खुशी ज़िन्दगी बिताना चाहिए!

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  2. आपके प्रश्न के उत्तर में दो लाइन लिखता हूँ जो मैने नहीं किसी बड़े साहित्यकार ने कही है-
    लाश थी इसलिए तैरती रह गई
    डूबने के लिए ज़िन्दगी चाहिए।
    --आशा है उत्तर मिल गया होगा।

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  3. जीवन में हर दिन एक नया दिन और हर रात एक नयी रात होनी चाहिए ....... नयी उमंग होनी चाहिए ......

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  4. Kabhi,kabhi bahav itna tez hota hai ki,ham bah niklte hain...bahte samay,hosh rahe,to bahav ke prati mauqa miltehi pratirodh bhi kar sakte hain!
    Bada achha laga padhke!

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  5. aapke kahi baat man ko choo gaye.

    par kahte hain na ke jab raat samapth hote hai tabhi nay subha hote hain.

    jeevan ka do rang hain sukh - dukh dono na ho to jeevan jeene ka koi matlab nahi rahta

    aap bahut acha lekhte hain
    meri subh kamnaaye aapke sath hain

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  6. हां जीवन ऐसे ही चलता है मार्क जी....बढिया है.

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  7. "Bikhare sitare"pe comment ke liye tahe dilse shukriya!

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  8. Bahut achhe vichar. Jindagi mein yahi sab to chalta rahata hai....

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  9. जीवन चलने का नाम.
    चलते रहो सुबहो शाम

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  10. नहीं mark जी sanghrson के bich jine का apna ही mza है .....!!

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