Friday, June 26, 2009

ईर्ष्या

कमजोर स्वाभिमान को देखना हो तो ईर्ष्या करो । आपकी अंतरात्मा हिल जायेगी । सारे गुण धुल जायेंगे । दुसरे का नुक्सान हो या न हो पर आपका तो पक्का होगा । शायद आगे की राह बंद हो जाय । शायद नही........ऐसा जरुर होगा । जब चरित्र ही ईर्ष्या करना शुरू कर दे ,तब पतन निश्चित है । यह भावी पीढियों के लिए भी नासूर बन जाएगा । इर्ष्या आपको भ्रष्टता की कब्र में धकेल देगा .......आप इसका दामन छोड़ दे ।

5 comments:

  1. kitna sahi kaha hai aapne...

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  2. बहुत बढ़िया! बिल्कुल सही फ़रमाया आपने!

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  3. बहुत सुन्दर अमृत वचन !

    हर एक को इसे पढना चाहिए !

    शुभकामनाएं !


    आज की आवाज

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  4. aap sabhi logo ko thanks aapne ....ise pasand kiya...

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  5. bhut hi shi seekh or aapke shabdo ne ise or bhi bhavpurna bna diya hai.......

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