Friday, June 19, 2009

एक बंगला बने न्यारा ....

बाहर कोई संगीत बज रहा है , ऐसा लगा ।
गीत चल रहा था ...
''एक बंगला बने न्यारा ......''
के एल सहगल साहब की आवाज में । रात के करीब ग्यारह बजे । यह गीत मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर देता है ।
सारे जीवन का फल्स्फां इसी में दिखता है ।
मुझे शुरू से ही पुराने गानों की हवा नसीब हुई है । उन हवाओं में जो आनंद है ...वह नए गाने के झोकों में कहाँ ।
अतीत के भूले बिसरे गीत मुझे अपनी पुरानी तहजीब याद दिलाते है । सोचते सोचते आंखों में नमी छा जाती है ।

4 comments:

  1. जी मार्क जी,
    सहगल साहब के गीत मुझे भी बहुत पसंद हैं ....एक गीत है इनका

    जब दिल ही टूट गया हम जी के क्या करेगें ...."
    मुझे बहुत ही पसंद है ....!!

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  2. जी मार्क जी,
    सहगल साहब के गीत मुझे भी बहुत पसंद हैं ....एक गीत है इनका

    जब दिल ही टूट गया हम जी के क्या करेगें ...."
    मुझे बहुत ही पसंद है ....!!

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  3. Singers like Sehagalji were the legends.No playback singer has been able to match his voice.Even the music and lyrics have changed over the years.Then ...ek bangla bane .....NOW....bhootni de.........ishq kamina.
    Music has changed.

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